Antardrishti Launches a forum for the friends of blind![]() Antardrishti, launched “antardrishti forum for friends of blind” on Sunday at the Youth Hostel, Agra. Two small children, Chunmun and Khushendra, both aged four years launched the forum by planting a tree at youth hostel. Both of them are blind from birth and learning Braille with the assistance of the Antardrishti. click here to see more photo आगरा । आज दिनांक 21 फरवरी 2010 को 3 बजकर 30 मिनट पर ''अन्तरदृष्टि फोरम फॉर फ्रेंण्डस ऑफ ब्लाइंड '' (Antardrishti Forum for Friends of Blind) की शुरूआत 4 वषीर्य दृष्टिहीनों बच्चों चुनमुन और खुशेन्द्र द्वारा पौधारोपड़ करके की गई। दोनों के परीवारी जनों के अलावा मुकेश जैन, डा अमर प्रकाश, श्रीधर उपाध्याय, शिल्पी, शिप्पी, आलोक कुलक्षेष्ठ ने पौधारोपड्र की प्रक्रियां में सहयोग किया । कार्यक्रम की शुरूआत दृष्ठिहीन बालिका मनीषा के गायन और सभागार मे उपस्थितजन के स्वागत के साथ हुई। तत्पश्चात ''अन्तरदृष्टि फोरम फॉर फ्रेंण्डस ऑफ ब्लाइंड '' के गठन की पृष्ठभूमि को पढ़ कर सुनाने के साथ्ा ही पौधारोपड़ कर फोरम की शुरूआत की। इस अवसर पर वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि दृष्टिहीनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़े बिना उनकों स्वावलम्बी नहीं बनाया जा सकता । दृष्टिहीनों को दया/दान की जरूरत नहीं है, उन्हें तो बस समान अवसर व कौशल की जरूरत है। सरकारी क्षेत्रों में तो आरक्षण की वजह से नौकरी मिल जाती है लेकिन निजी क्षेत्रों में दृष्टिहीनों के लिए रोजगार के अवसर न के बराबर है । जरूरत इस बात की है कि निजी क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसरों की संभावनाओं को तलाशा जाना चाहिए और जरूरत पढ़ने पर उपयुक्त प्रशिक्षण का भी इंतजाम होना चाहिए। दृष्टिहीनों के परीवारी जन, मित्रों, और हितेषीयों को एक मंच पे लाकर दृष्टिहीनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से गठित फोरम की शुरूआत पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए वक्ताओं ने यह उम्मीद की समाज के विभिन्न तबके के लोग भी इस मंच से न सिर्फ जुड़ेगें बल्कि भरपूर सहयोग भी देगें। कार्यक्रम के अंत में सभागार में उपस्थित जन से अपील की गई कि वह इस फोरम के सदस्य बनें और साथ ही साथ नेत्रदान का भी संकल्प ले ताकि काफी संख्या में दृष्टिहीनों की दृष्टि वापास आ सकें। लगभग 40 लोगों ने नेत्रदान का संकल्प लिया तथा यह उम्मीद की और भी लोग इस कार्य से जुड़ेगें। वक्ताओं में मुख्य रूप से श्रीधर उपाध्याय, जयकरन, शिल्पी, शिप्पी, मनोहर लाल गिदवानी, डा. अंनत बाजपेयी, मनीष, नरेन्द्र कुमार बघेल, ब्रजेश, डा. खिम्मनजी, भावना त्रिपाठी ने अपने विचार रखें। कार्यक्रम का संचालन रमेश शर्मा ने किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से डा. पुष्पा श्रीवास्तव, डा. बचन सिंह सिकरवार, मंजू उपाध्याय, अजय, रफीक, उषा श्रीवास्तव, शिवशंकर, गया प्रसाद अनुरागी, रघुनाथ, रामधनुष, पन्नीराम, अमरीषपुरी आदि का सहयोग सराहनीय रहा। |
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