दृष्टिहीन छात्राओं शिल्‍पी और सिप्‍पी द्वारा ग्रीष्‍मकालीन शिविर की शुरूआत

आज दिनांक 20 मई 2012 को अंतरदृष्टि संगठन द्वारा दृष्टिहीनों के लिए लगाये जाने वाले ग्रीष्‍मकालीन शिविर की शुरूआत दृष्टिहीन छात्राओं शिल्‍पी और सिप्‍पी ने की। लगभग 2 घंटे तक चले उदघाटन सत्र में श्रीधर उपाध्‍याय ने दृष्टिहीन युवक युवतियों को ब्रेल लिपि, कम्‍प्‍यूटर, ओरिएंटेशन और मोबिलिटी यानी छडी की सहायता से चलना, अपने आस-पास चीजों / जगह को पहचानना आदि के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए अखिल श्रीवस्‍तव ने दृष्टिहीनों के लिए व्‍यक्तित्‍व विकास का महत्‍व, रोजगार के अवसरों मुख्‍य रूप से गैरसरकारी संस्‍थानों में उपलब्‍ध अवसरों के बारे में बताया। उन्‍होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यदि दृष्टिहीन अपने व्‍यक्तिव पर ध्‍यान दे और थोड़ा समाज दया के बजाय अवसर उपलब्‍ध कराये तो दृष्टिहीनों की स्थिति में काफी सुधार हो सकता है।

आई. ए. एस. बनने का ख्‍वाब देखने वाली दृ‍ष्टिहीन सिप्‍पी इस शिविर को लेकर बहुत उत्‍साहित है, उनका कहना है कि वो कम्‍पूयटर और ब्रेल सीखना चाहती है ताकि वो अपनी पढ़ाई अच्‍छे से कर सके और आई. ए. एस. बन देश की सेवा कर सके। बी.टी.सी. की ट्रेनिंग करने के साथ – साथ सिविल सर्विसेज की भी तैयारी कर रही दृष्टिहीन शिल्‍पी का कहना है कि इस तरह के शिविर उनके जैसी दृष्टिहीन छात्राओं के लिए बहुत महत्‍वपूर्ण है, क्‍योंकि आगरा जैसे शहर में दृष्टिहीन छात्राओं को सीखने के लिए किसी भी प्रकार की कोई सुविधा उपलब्‍ध नहीं हैं ।

इससे पूर्व अंतरदृष्टि के अखिल श्रीवास्‍तव ने 1 महीने तक चलने वाले‍ शिविर के उद्देश्‍यों, महत्‍व, रोजगार के अवसर आदि के बारे बताया । कार्यक्रम में आयी निधि (दृष्टिहीन सिप्‍पी की बहन) ने भी ब्रेल और कम्‍पयूटर सीखने की इच्‍छा जतायी, ताकि वो भी अपनी दृष्टिहीन बहन को ब्रेल सिखने में मदद कर सके और सिप्‍पी जैसे ही अन्‍य दृष्टिहीनों की मदद कर सकें।

कार्यक्रम के अंत में आपस में चर्चा करके यह तय किया गया कि सप्‍ताह में 2 दिन यानी शुक्रवार, शनिवार को शाम को 4 बजे से 6 बजे तक और रविवार को प्रातः 9 बजे से शाम 6 बजे तक कक्षाएं चलेगी।

कार्यक्रम के दौरान हुई चर्चा में मुख्‍य रूप से शिल्‍पी, सिप्‍पी, निधि, ऊषा श्रीवास्‍तव, मनोहर लाल गिदवानी, अमर प्रकाश, सरनाम, हरपाल, अजहर उमरी, विनती, रितेश बत्रा, शालू, सुमीता, अजय, शालू, श्रीधर उपाध्‍याय, सुधीर आदि ने भाग लिया।

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